स्त्रीयों को समर्पित

मैं स्त्री हूँ...सहती हूँ... तभी तो तुम कर पाते हो गर्व,अपने पुरुष होने पर।। मैं झुकती हूँ...... तभी तो ऊँचा उठ पाता है तुम्हारे अहंकार का आ...

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बारिश

याद करता हूँ वह वक़्त जब बारिश की पहली बूँद मुझे बताती थी की छाता खोलने का वक़्त आ गया है.और जब मैं छाता खोलता था तुम मुझे रोक लेती थी. और ह...

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