अविस्मरणीय २०२० (Unforgettable 2020)

 


कुछ दोस्त छूटे, तो कुछ रिश्ते टूटे | 

कइयों के तो परिवार भी छूटे | 

मुखौटे भी हटे हैं यहाँ तो कई, 

अपने और परायों की पहचान हो गई | 


समय बहुत ही कठिन था,

मन कशमकश में लीन था | 

माना की सँभलने के लिए गिरना  जरुरी होता है,

पर औरों को अपने साथ गिराना भी मुझे मंज़ूर कहाँ था | 


ये साल कुछ इस क़दर झिंझोड़ गया, 

नया सवेरा ही नई उम्मीद बन गया | 

भीगी पलकों से विदा करते हैं अब इस साल को,

शायद ये हमे बेहतर इंसान कर गया | 


- तुषारिका




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