सोती बहन

कभी कभी कुछ कहने के लिए अच्छे शब्द ज़रूरी होते हैं। मैंने चाहा था कि शब्दों का चुनाव बेहतर कर सकूँ। पर मुझसे हो नहीं पाया जैसे मैं नहीं चुन पाया कभी दिल के सबसे नज़दीक वाले लोगों से ये कहने में कि मुझे कितना प्रेम है उनसे। ख़ैर, जो भी है हाज़िर है। एक बात और, हमेशा याद रखना कि भाई हमेशा चाहता है कि वो बहन के लिए उससे ज़्यादा हो जितना कभी भी वो सकता है।
हाफ पैन्ट और झक्क सफ़ेद बनियान
सोती बहन के पहरे पर भाई बैठा है।
हाथ से पंखा करते करते रुकता है
बच्चा है आख़िर थक जाता है।
बहन भी सोते सोते चौंक उठती है
शायद पिछले जीवन का कुछ देख रही है।
घुटनों के बल बैठे बैठे बेड के पास
वो गुपचुप गुपचुप बतियाता है
और अपनी एक तर्जनी बड़े धीमे से
बहन के नन्हे हाथों में रख देता है।
भाई एकटक देख रहा है सोता चेहरा
जाने कब वो मुस्काये बस पल भर को।
वो फ़िर पूछेगा माँ से सोते में क्यों हँसती है
क्या सपने में भी भाई के साथ खेल रही है?
खेल खिलौने सारे अलमारी में बंद हुए हैं
बहन की ख़ातिर आख़िर कोई धरोहर रखनी है।
अभी तो कितनी छोटी है बादल की टुकड़ी सी
लेकिन मिलकर कितनी धमाचौकड़ी करनी है।
बैरंग वापस भेज दिया है 'टीम' को उसने
उसका मन बस बहन के पास लगा हुआ है।
वो सोच रहा है अगले सारे साल
उसका बस्ता अपनी पीठ पर ले जाएगा।
अरे अरे! ये क्यों रोई एकदम से
शायद कोई चोट लगी हो सपने में।
भाई घबराकर दौड़ा माँ को लाने
'
माँ जल्दी आओ बिटिया जागी है!'

श्श्श! सोती बहन के पहरे पर भाई बैठा है।

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